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चार माह से नहीं मिला वेतन, मनरेगा कर्मी भूख और बेबसी से जूझ रहे — यू. डी. मिंज

 

कुनकुरी । छत्तीसगढ़ में सुशासन का दावा करने वाली विष्णु देव साय की सरकार की हकीकत यह है कि राज्य के 12 हजार से अधिक मनरेगा कर्मचारी बीते चार माह से वेतन के लिए तरस रहे हैं। ये वही कर्मचारी हैं जो गांव-गांव जाकर योजनाओं को ज़मीन पर उतारते हैं, ग्रामीणों को रोजगार देते हैं और विकास के पहिए को धक्का देते हैं। लेकिन आज वही कर्मचारी आर्थिक तंगी और मानसिक शोषण के शिकार हैं।

पूर्व संसदीय सचिव यू. डी. मिंज ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “एक ओर सरकार शिक्षकों को युक्तियुक्तकरण की आड़ में अपमानित कर रही है, जैसे वे कोई अपराधी हों। वहीं दूसरी ओर मनरेगा कर्मचारियों को चार महीने से वेतन नहीं देना यह दर्शाता है कि यह सरकार कर्मचारियों की चिंता नहीं करती, केवल प्रचार की राजनीति करती है।

दर्जनों योजनाएं, लेकिन पेट भरने को वेतन नहीं

मनरेगा कर्मचारियों के कंधों पर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), स्वच्छ भारत मिशन, पीएम जनमन योजना, अमृत सरोवर, नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी जैसी दर्जनों योजनाओं का क्रियान्वयन टिका है। लेकिन हाल यह है कि जून 2025 तक का वेतन अभी तक नहीं दिया गया। नतीजा — कर्मचारियों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है।

बच्चों की पढ़ाई भी पड़ी खतरे में
स्कूल खुल चुके हैं, लेकिन कई मनरेगा कर्मचारी अपने बच्चों की फीस तक नहीं भर पा रहे। बिजली बिल, राशन, किराया जैसी जरूरी ज़रूरतें भी अधूरी हैं। मानसिक तनाव इतना बढ़ गया है कि कई कर्मचारी ड्यूटी के दौरान भी फूट-फूटकर रोने लगे हैं।

“हर बार सिर्फ आश्वासन, अब उम्मीदें भी टूटीं”

यू. डी. मिंज ने कहा —कि उन्हें”चार महीने से वेतन नहीं मिला है। जिससे उनका घर चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई छूट रही है। अधिकारी सिर्फ भरोसा देते हैं, लेकिन अब तो वो भी खोखला लगता है।”पर्व संसदीय सचिव मिंज ने कहा —”विष्णु देव साय जी प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री होने का दावा करते हैं, तो फिर वे इस स्थिति पर मौन क्यों हैं? क्या सुशासन का मतलब यह है कि शिक्षक और कर्मचारी रोज जिल्लत झेलें, और सरकार सिर्फ धर्म यात्राओं और प्रचार में लगी रहे?”

उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि तत्काल मनरेगा कर्मचारियों का लंबित वेतन जारी किया जाए और शिक्षकों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार और स्थानांतरण की मनमानी पर भी नियंत्रण लगाया जाए।

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